“ताज महल अगर
प्रेम कि निशानी है
तो “ 14 अप्रैल " भी
एक शेर कि कहानी है..!
भीम ने आँख खोली‚
हर कोई ईन्सान बन गया।
भीम ने जुबाँ खोली‚
हर कोई तुफान बन गया।
भीम ने किताब खोली‚
हर कोई विद्वान बन गया।
भीम ने कलम खोली‚
और इस देश का
संविधान बन गया।
ओर इस संविधान की वजह से
चाय बेचनेवाला आज
प्रधानमत्री बन गया
प्रेम कि निशानी है
तो “ 14 अप्रैल " भी
एक शेर कि कहानी है..!
भीम ने आँख खोली‚
हर कोई ईन्सान बन गया।
भीम ने जुबाँ खोली‚
हर कोई तुफान बन गया।
भीम ने किताब खोली‚
हर कोई विद्वान बन गया।
भीम ने कलम खोली‚
और इस देश का
संविधान बन गया।
ओर इस संविधान की वजह से
चाय बेचनेवाला आज
प्रधानमत्री बन गया
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