बन्दर को भगवान मानेंगे गाय को माँ मानेंगे साँप को भी देवता मानेंगे कछुवे को भी भगवान मान लेंगे लेकिन इन्सान को इंसान नही मानेंगे इन्सान को नीच, अछूत, हरिजन जैसे शब्दों से नवाजेंगे pura jankari padhe honge aap ke fayede ke
✔बन्दर को भगवान मानेंगे ।
✔गाय को माँ मानेंगे ।
✔कुतिया को भी माता मानेंगे ।
✔साँप को भी देवता मानेंगे ।
✔बैल को भी बाप मान लेंगे ।
✔सूअर को भगवान मान लेंगे ।
✔मछली को भी भगवान मान लेंगे ।
✔हाथी को भी भगवान मान लेंगे ।
✔कछुवे को भी भगवान मान लेंगे लेकिन इन्सान को इंसान
नही मानेंगे ।
✔इन्सान को नीच, अछूत, हरिजन जैसे शब्दों से नवाजेंगे ।
क्या ये इसी ग्रह के प्राणी हैं या फिर दूसरे ग्रह से
आये हुए एलियन है?
आखिर इंसानों से इनको इतनी नफरत क्यों हैं ?
क्या ये खुद जानवर तो नही हैं जो भूलवश इंसान बन गए हैं या
फिर जानवरों को पूजते पूजते ये खुद को भी जाणवर समझने लगे हैं ?
खैर ये लोग कुछ भी हों लेकिन हमारे हितैषी, हमारे भाई
कभी नही हो सकते ।
इनका धर्म और शोषित वंचितों का धर्म भी एक नही हो
सकता ।
एक ही धर्म के लोगो में इस कदर नफरत, छुआछूत, द्वेष भावना नही हो सकती ।
धर्म जोड़ने के लिए होता है तोड़ने के लिए नही जबकि ये हमेशा से तोड़ते आये हैं ।
शोषक और शोषितों का धर्म कभी भी एक नही हो सकता ।
✔गाय को माँ मानेंगे ।
✔कुतिया को भी माता मानेंगे ।
✔साँप को भी देवता मानेंगे ।
✔बैल को भी बाप मान लेंगे ।
✔सूअर को भगवान मान लेंगे ।
✔मछली को भी भगवान मान लेंगे ।
✔हाथी को भी भगवान मान लेंगे ।
✔कछुवे को भी भगवान मान लेंगे लेकिन इन्सान को इंसान
नही मानेंगे ।
✔इन्सान को नीच, अछूत, हरिजन जैसे शब्दों से नवाजेंगे ।
क्या ये इसी ग्रह के प्राणी हैं या फिर दूसरे ग्रह से
आये हुए एलियन है?
आखिर इंसानों से इनको इतनी नफरत क्यों हैं ?
क्या ये खुद जानवर तो नही हैं जो भूलवश इंसान बन गए हैं या
फिर जानवरों को पूजते पूजते ये खुद को भी जाणवर समझने लगे हैं ?
खैर ये लोग कुछ भी हों लेकिन हमारे हितैषी, हमारे भाई
कभी नही हो सकते ।
इनका धर्म और शोषित वंचितों का धर्म भी एक नही हो
सकता ।
एक ही धर्म के लोगो में इस कदर नफरत, छुआछूत, द्वेष भावना नही हो सकती ।
धर्म जोड़ने के लिए होता है तोड़ने के लिए नही जबकि ये हमेशा से तोड़ते आये हैं ।
शोषक और शोषितों का धर्म कभी भी एक नही हो सकता ।
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