शुभ सन्देश जिसको देखूँ तेरे दर का पता पूछता है,तू समन्दर है तो क्यूँ आँख दिखाता है मुझे बहुत ही अछि लिखा है पूरा पढ़े
जिसको देखूँ तेरे दर का पता पूछता है,
क़तरा क़तरे से समंदर का पता पूछता है
तू समन्दर है तो क्यूँ आँख दिखाता है मुझे,
औस से प्यास बुझाना अभी आता है मुझे
आँखों में रहा दिल में उतरकर नहीं देखा,
कश्ती के मुसाफ़िर ने समन्दर नहीं देखा !
मैं दरिया भी किसी गैर के हाथों से न लूं
एक कतरा भी समन्दर है अगर तू देदे!
क़दम दर क़दम ज़िन्दगी,दौरे इम्तिहान है
कहीं सहरा कहीं समन्दर,कहीं गर्दिशे अय्याम है
क़तरा क़तरे से समंदर का पता पूछता है
तू समन्दर है तो क्यूँ आँख दिखाता है मुझे,
औस से प्यास बुझाना अभी आता है मुझे
आँखों में रहा दिल में उतरकर नहीं देखा,
कश्ती के मुसाफ़िर ने समन्दर नहीं देखा !
मैं दरिया भी किसी गैर के हाथों से न लूं
एक कतरा भी समन्दर है अगर तू देदे!
क़दम दर क़दम ज़िन्दगी,दौरे इम्तिहान है
कहीं सहरा कहीं समन्दर,कहीं गर्दिशे अय्याम है
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