देश अंग्रेजों से आजाद होकर भी गुलाम रहेगा क्योंकि इन अछुतों को कौन आजाद कराएगा देश को तो सब ने मिल कर आजाद कराया लेकिन अछूत चमार लोगो को तो अकेले बाबा साहब डॉ भीम राव अम्बेडकर लड़ कर आजाद कराया पूरा पढ़े इनके बारे में क्या है असलियत ........
एक बार भगत सिंह रेलगाड़ी से कहीं जा रहे हैं थे और एक स्टेशन पर गाड़ी रुकी।
गाड़ी को बहुत देर रुकना था
तो भगतसिंह पानी पीने के लिए उतरे।
पास ही एक कुँए पास गये ,और पानी पिया तभी उनकी नजर कुछ दूर पर खड़े एक शख्स पर पड़ी जो धूप में नंगे बदन खड़ा था और बहुत भारी वजन भी अपने कंदे रखा था,
तरसती हुई आंखों से पानी को ओर देख रहा था
मन में सोच रहा था ,मुझको थोड़ा पानी पीने को मिल जाये।
भगत सिंह उसके पास गए,और पूछने लगे आप कौन हो
और इतना भारी वजन को धूप में क्यो उठाये हो*
तो उसने डरते हुए कहा,"साहब आप मुझसे दूर रहे नहीं तो आप अछूत हो जायँगे
क्योंकि मैं एक बदनसीब अछूत हूँ"।
भगत सिंह ने कहा आपको प्यास लगी होगी
पहले इस वजन को उतारो और मैं पानी लाता हूँ
आप पानी पी लो
भगत सिंह के इस व्यवहार से वह बहुत खुश हुआ
भगत सिंह ने उसको पानी पिलाया और फिर पूछा आप अपने आपको अछूत क्यों कहते हो
तो उसने जवाब दिया हिम्मत करते हुए
अछूत मैं नहीं कहता अछूत तो मुझको एक वर्ग विशेष के लोग बोलते हैं
और मुझसे कहते हैं आप लोग अछूत हो
तुमको छूने से धर्म भृष्ट हो जयेगा
और मेरे साथ जानवरों जैसा सलूक करते हैं
आप ने तो मुझको पानी पिला दिया नहीं तो मुझको पानी भी पीने का अधिकार नही हैं,और न ही छाया में भी खड़े होने का अधिकार हैं*
और न ही सार्वजनिक कुँए से पानी पीने का अधिकार हैं*
तब भगत सिंह को आभास हुआ
मुझको तो बचपन से यही बताया गया हैं की देश अंग्रेजों से गुलाम हैं पर ये तस्वीर तो कुछ और ही बयाँ करती हैं
देश तो एक वर्ग विशेष से, धर्मवादियों से गुलाम हैं
जो धर्म के नाम भारत को मूर्ख बनाये हुए हैं
तभी भगत सिंह सोचने लगे
देश अंग्रेजों से आजाद होकर भी गुलाम रहेगा
क्योंकि
इन अछुतों को कौन आजाद कराएगा
तब भगत सिंह ने बाबा साहब के बारे में जाना(उस समय बाबा साहब विदेश में थे,)
फिर भगत सिंह ने इस बात को लेकर अध्यन किया
और फिर सोंचने लगे इनकी ऐसी हालत कैसे हुई,
भगत सिंह ने "मैं नास्तिक क्यों" पुस्तक में लिखा हैं
मैं तो नकली दुश्मनों से लड़ रहा था,असली दुश्मन तो मेरे देश में हैं
जिनसे अकेले बाबा साहब डॉ भीम राव अम्बेडकर लड़ रहे हैं
अगर मैं जेल से छुटा तो आजीवन बाबा साहब के साथ रहते हुए, इन अछुत अस्पर्श्य भारतीयों की आजादी के लिए लड़ूंगा।
✊जय भीम जय भारत🙏
गाड़ी को बहुत देर रुकना था
तो भगतसिंह पानी पीने के लिए उतरे।
पास ही एक कुँए पास गये ,और पानी पिया तभी उनकी नजर कुछ दूर पर खड़े एक शख्स पर पड़ी जो धूप में नंगे बदन खड़ा था और बहुत भारी वजन भी अपने कंदे रखा था,
तरसती हुई आंखों से पानी को ओर देख रहा था
मन में सोच रहा था ,मुझको थोड़ा पानी पीने को मिल जाये।
भगत सिंह उसके पास गए,और पूछने लगे आप कौन हो
और इतना भारी वजन को धूप में क्यो उठाये हो*
तो उसने डरते हुए कहा,"साहब आप मुझसे दूर रहे नहीं तो आप अछूत हो जायँगे
क्योंकि मैं एक बदनसीब अछूत हूँ"।
भगत सिंह ने कहा आपको प्यास लगी होगी
पहले इस वजन को उतारो और मैं पानी लाता हूँ
आप पानी पी लो
भगत सिंह के इस व्यवहार से वह बहुत खुश हुआ
भगत सिंह ने उसको पानी पिलाया और फिर पूछा आप अपने आपको अछूत क्यों कहते हो
तो उसने जवाब दिया हिम्मत करते हुए
अछूत मैं नहीं कहता अछूत तो मुझको एक वर्ग विशेष के लोग बोलते हैं
और मुझसे कहते हैं आप लोग अछूत हो
तुमको छूने से धर्म भृष्ट हो जयेगा
और मेरे साथ जानवरों जैसा सलूक करते हैं
आप ने तो मुझको पानी पिला दिया नहीं तो मुझको पानी भी पीने का अधिकार नही हैं,और न ही छाया में भी खड़े होने का अधिकार हैं*
और न ही सार्वजनिक कुँए से पानी पीने का अधिकार हैं*
तब भगत सिंह को आभास हुआ
मुझको तो बचपन से यही बताया गया हैं की देश अंग्रेजों से गुलाम हैं पर ये तस्वीर तो कुछ और ही बयाँ करती हैं
देश तो एक वर्ग विशेष से, धर्मवादियों से गुलाम हैं
जो धर्म के नाम भारत को मूर्ख बनाये हुए हैं
तभी भगत सिंह सोचने लगे
देश अंग्रेजों से आजाद होकर भी गुलाम रहेगा
क्योंकि
इन अछुतों को कौन आजाद कराएगा
तब भगत सिंह ने बाबा साहब के बारे में जाना(उस समय बाबा साहब विदेश में थे,)
फिर भगत सिंह ने इस बात को लेकर अध्यन किया
और फिर सोंचने लगे इनकी ऐसी हालत कैसे हुई,
भगत सिंह ने "मैं नास्तिक क्यों" पुस्तक में लिखा हैं
मैं तो नकली दुश्मनों से लड़ रहा था,असली दुश्मन तो मेरे देश में हैं
जिनसे अकेले बाबा साहब डॉ भीम राव अम्बेडकर लड़ रहे हैं
अगर मैं जेल से छुटा तो आजीवन बाबा साहब के साथ रहते हुए, इन अछुत अस्पर्श्य भारतीयों की आजादी के लिए लड़ूंगा।
✊जय भीम जय भारत🙏
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