जो झुक सकता है; वह सारी दुनिया को झुका सकता है गंगा में डुबकी लगाकर तीर्थ किये हजार; इनसे क्या होगा अगर बदले नहीं विचार क्रोध हवा का वह झोंका है; जो बुद्धि के दीपक को बुझा देता है:!
जो झुक सकता है; वह सारी दुनिया को झुका सकता है गंगा में डुबकी लगाकर तीर्थ किये हजार; इनसे क्या होगा अगर बदले नहीं विचार क्रोध हवा का वह झोंका है; जो बुद्धि के दीपक को बुझा देता है:!