आइये हम सब बकरी बन जायें
क्या बकरी का 'राइट टू फूड' नहीं है ? लानत है लीगल सिस्टम पर। बकरी घास खाती है और जहां-जहां घास होगी वहीं-वहीं तो खाएगी। शहरों और मानव आबादी के विस्तार ने घास की सारी जगहों को निगल लिया है। इसलिए जहां कहीं भी घास बची है उस पर बकरियों का हक घोषित कर दिया जाए। नोटिस लगे कि इस हरी घास पर किसी भी बकरी का अधिकार है। जज साहब के अहाते में बेचारी बकरी किन मजबूरियों में चरने जाती होगी, इस पर बक़ायदा संसद में बहस होनी चाहिए। बकरी को जेल भिजवाने वाले उस चपरासी से पूछा जाना चाहिए कि थाने जाने का आदेश किसका था। मेम साहब का या जज साहब का।
बकरी को गिरफ़्तार करने का कानून नहीं है लिहाज़ा उसके मालिक को जेल भेज दिया गया। कानून न होने के कारण बकरी जेल से बाहर आ गई। मालिक जेल में है तो बकरी कैसे खाएगी। कहां चरने जाएगी । क्या इस बारे में थानेदार ने सोचा ? बकायदा ज़िला प्रशासन को पशु-पक्षियों को बुलाकर नोटिस पढ़ना चाहिए। हे तोता, तुम जज साहब के अहाते में लगे अमरूद को नहीं खा सकते। हे गौरैया, तुम जज साहब के आंगन में दाने चुगने मत जाना वर्ना ताज़िराते हिन्द की बेवफ़ा दफ़ाओं के तहत तुम्हें क़ैदें बामशक्कत की सज़ा सुना दी जाएगी ।
वैसे बकरियां गिरफ़्तार होती रही हैं । पिछले साल सितंबर महीने में एक बकरी काफी चेन के दरवाज़े पर खड़ी हो गई। बार-बार भगाने पर भी नहीं भागी । क्या पता उसे कैपुचिनो कॉफ़ी पीने की तलब हो। जरूरी तो नहीं कि बकरी है तो सिर्फ घास खाएगी और फिर उसे मारकर आदमी खा जाएगा। बकायदा रॉयल कनेडियन माउंटेड पुलिस आई और बकरी को गिरफ़्तार कर जेल ले गई । यूएसटुडे अख़बार ने कवर किया है ।
डेली मेल लंदन की एक रिपोर्ट के अनुसार एक बकरी को डाका डालने के आरोप में गिरफ़्तार कर लिया गया। 2009 की घटना है और हथियारबंद डाका डालने के आरोप में गिरफ़्तार बकरी नाइजीरिया की थी। नाइजीरियाई पुलिस ने गिरफ़्तार किया था। लोगों ने आरोप लगाया था कि ये कार लुटेरे हैं। लूट के बाद बकरी बन जाते हैं। नाइजीरियाई पुलिस ने कहा कि हम इसकी पुष्टि नहीं कर सकते लेकिन बकरी हमारी हिरासत में हैं।
इन बकरियों की सहनशीलता की तारीफ होनी चाहिए । इंसान मूर्ख हो गया लेकिन बकरियों ने अपना धीरज नहीं खोया। वैसे बापू की भी एक बकरी थी जिसका नाम निर्मला था। जज साहब को पता होना चाहिए कि राष्ट्रपिता ने बकरी पाली थी। इसलिए बकरियां हमारी राष्ट्रीय धरोहर हैं। गांधी मारे जा सकते हैं। बकरियां मारी जाती हैं लेकिन बकरियां गिरफ़्तार हो सकती है इस आशंका से जी घबराहट में मुस्कुराता है। आपको कानून से बचना है तो बकरी बन जाइये। ज़मींदारों के घर टाइप जजों के बंगलों की ज़मीन में चरने का दुस्साहस कीजिये।
बकरियों तुम संघर्ष करो, हम तुम्हारे साथ हैं। जज का बंगला हो या डीएम का, घास होगी बकरी की। घास-घास पे लिक्खा होगा, हसन की बकरी खाएगी। ये सब नारे हैं। आप सब जहां हैं वहीं ज़ोर लगाइये और बकरी बन जाइये।
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